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Spasticity

स्पास्टिसिटी पक्षाघात का पार्श्वप्रभाव है जो कि मांसपेशी की हल्की अकड़न से लेकर सख्त असहनीय टांगों की गतिविधि तक हो सकती है। लक्षणों में मांसपेशी की बढ़ी हुई टोन से लेकर, त्वरित मांसपेशी सिकुड़न, अतिरंजित गहरी पेशी रिफलेक्सेस, मांसपेशी की ऐंठन, सिसरिंग (टांगों की बेवश चौकड़ी ), और स्थिर जोड़ सम्मिलित हो सकते हैं।

स्पास्टिसिटी का कारण प्राय: मस्तिष्क के हिस्से या अनैच्छिक गतिविधि को नियंत्रित करने वाली रीढ़ रज्जु की क्षति होती है। बहुत संभव है कि यह रीढ़ रज्जु की चोट, बहुत से ऊतक दृढ़न, सेरिब्रल पैल्सि, एनॉक्सिक ब्रेन डैमेज, ब्रेन ट्रौमा, सिर की सख्त चोट या कतिपय उपापचयी बीमारियों के साथ घटित हो। स्पास्टिसिटी पुनर्वास या रोजमर्रा की जिंदगी की गतिविधियों में दखल दे सकती है।

जब लोगों को पहले-पहल चोट लगती है तो उनकी मांसपेशियां उस वजह से कमजोर एवं लचीली होती हैं जिसे कि स्पाइनल शॉक कहा जाता है : चोट के स्तर के नीचे शरीर के रिफलेक्सेस गायब रहते हैं, यह प्राय: कुछ हफ्ते या कई महीनों तक बना रहता है। एक बार जैसे ही स्पाइनल शॉक खत्म हो जाता है रिफलेक्स गतिविधि वापस लौट आती है।

चोट के स्तर के नीचे चूंकि नस के संदेशों का सामान्य बहाव बाधित होता है इसलिए हो सकता है कि वे संदेश मस्तिष्क के रिफलेक्स केंद्र तक नहीं पहुंचें। इसके बाद रीढ़ रज्जु शरीर की प्रतिक्रिया को मद्धिम करने का प्रयास करती है। चूंकि रीढ़ रज्जु मस्तिष्क जितनी कुशल नहीं होती इसलिए संवेदना की जगह पर वापस भेजे जाने वाले संकेत अक्सर अतिशयोक्तिपूर्ण होते हैं। यह मांसपेशी की अति सक्रिय प्रतिक्रिया होती है जिसका उल्लेख डॉक्टर स्पास्टिक हाइपरटोनिआ के रूप में करते हैं : बेवश ''जर्किंग'' गतिविधि, मांसपेशियों का अकड़ना या कड़ा होना, मांसपेशी या मांसपेशियों के समूह का शॉक जैसी ऐंठन और मांसपेशियों में असामान्य टोन।

एससीआई वाले अधिकतर लोग किसी न किसी रूप में स्पास्टिक हाइपरटोनिया महसूस करते हैं। सर्विकल चोट वाले लोग और अधूरी चोटों वाले लोगों में उन लोगों के मुकाबले एसएच महसूस करने के आसार अधिक होते हैं जो कि पैराप्लेजिआ और या/पूर्ण चोटों वाले होते हैं। वे सर्वाधिक आम मांसपेशियां जिनमें कि ऐंठन होती है वे होती हैं जो कि कुहनी (फ्लेक्सर) को मोड़ती हैं या टांग को फैलाती हैं (एक्सटेंसर)।

ये प्राय: दर्दभरी संवेदनाओं की स्वचालित प्रतिक्रिया के फलस्वरूप घटित होती हैं।

स्पास्टिसिटी इसके अलावा ऐसी दशा को भी परिभाषित करती है जिसमें कुछ मांसपेशियां निरंतर संकुचित होती हैं। यह अकड़न या सख्ती चाल, गतिविधि और वक्तृत्व के साथ दखल दे सकती है।

जरूरी नहीं कि स्पास्टिसिटी खराब चीज हो। कुछ लोग अपनी ऐंठनों को प्रकार्य के लिए, अपने मूत्राशय को खाली करने के लिए, हस्तांतरण के लिए, कपड़े पहनने के लिए प्रयोग में लाते हैं। अन्य लोग इसका प्रयोग अपनी मांसपेशियों को सौष्ठवयुक्त बनाये रखने और संचरण को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। यह हड्डियों की शक्ति को बनाये रखने में सहायता कर सकती है।

बदलती स्पास्टिसिटी

डेनवेर के क्रेग अस्पताल के अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार व्यक्ति की स्पास्टिसिटी में परिवर्तन स्वयं में एक लक्षण हो सकता है। उदाहरण के लिए, रीढ़ रज्जु में सिस्ट या केविटी (कई बार इसे पोस्ट-ट्रौमेटिक सिरिंजोमाइलिआ कहते हैं) और अधिक स्पास्टिसिटी की ओर ले जा सकती है। इसके अलावा, कम होती या गायब होती स्पास्टिसिटी सिस्ट का संकेत हो सकती है।

ऐसी अन्य बीमारियां - ट्यूमर, गिलेन-बार सिंड्रोम, ट्रांसवर्स मेलिटिस, रीढ़ रज्जु का आघात आदि, जो कि रीढ़ रज्जु में विकसित हो सकती हैं, भी स्पास्टिसिटी के परिवर्तित होने का कारण हो सकती हैं। और मूत्राशय का संक्रमण या त्वचा के जख्म भी स्पास्टिसिटी के बढ़ने का कारण हो सकते हैं।

स्पास्टिसिटी के उपचार में बैक्लोफेन, डायजापाम या जानाफ्लेक्स जैसी दवाएं शामिल हो सकती हैं। तीव्र ऐंठनों वाले कुछ लोग बैक्लोफेन पंपों का प्रयोग करते हैं जो कि छोटे, शल्यक्रियात्मक ढंग से आरोपित जलाशय होते हैं जो कि औषधि को सीधे रीढ़ रज्जु डिसफंक्शन के क्षेत्र में एप्लाई करते हैं। यह उच्च मौखिक खुराक की दिमाग को कुंद करने वाले पार्श्वप्रभावों के बिना औषधि संकेंद्रण की अनुमति प्रदान करता है।

हाल के वर्षों में कुछ डॉक्टरों ने बच्चों में स्पास्टिसिटी का इलाज बोटोक्स के साथ किया है जो कि झुर्रियों के लिए सौंदर्य-प्रसाधन के रूप में काम में लाया जाने वाला मांसपेशी को शिथिल बनाने वाला एजेंट होता है।

मांसपेशी को खींचना, तरह-तरह की गति के अभ्यास और अन्य भौतिक चिकित्सा रेजिमेन्स समेत भौति चिकित्सा जोड़ों की जकड़न (मांसपेशी का सिकुड़ना या छोटा होना) को रोकने और लक्षणों की तीव्रता को घटाने में सहायता कर सकती है।

कई बार टेंडन के स्राव या सेरिब्रल पैल्सि वाले बच्चे में नस-मांसपेशी मार्ग को सख्त बनाने के लिए सर्जरी की सिफारिश की जाती है। अकड़न से अगर बैठने, नहाने या सामान्य देखभाल में परेशानी हो रही है तो चुनिंदा डोर्सल रिजोटोमी पर विचार किया जा सकता है।

स्पास्टिसिटी ऐसे बहुत से लोगों के लिए टेरिटरी के साथ आती है जो कि अपाहिज होते हैं। उपचार रणनीति आपके प्रकार्य पर आधारित होनी चाहिए : क्या स्पास्टिसिटी कुछ चीजें करने से रोक रही है? क्या सुरक्षा के लिए जोखिम हैं -- अपनी पावर व्हील चेयर या ऑटोमोबाइल चलाते समय नियंत्रण खो देना? क्या ऐंठन-रोधी दवाएं लक्षण से खराब हैं और एकाग्रता तथा/या ऊर्जा स्तर को प्रभावित करती हैं? क्या ऐंठनें उससे ज्यादा हो रही हैं जितने को कि आपके देखभालकर्ता संभाल सकते हैं? अगर इनमें से किसी का भी उत्तर हां में है तो अपने विकल्पों का पता लगाने के लिए अपने डॉक्टर से संपर्क करें।

स्रोत :

नेशनल मल्टीपल सेरोसिस सोसायटी, यूनाइटेड सेरिब्रल पैल्सि एसोसिएशंस, नेशनल स्पाइनल कॉर्ड इंजरी स्टेटिस्टिकल सेंटर, क्रेग हॉस्पिटल, यूनिवर्सिटी आफ एलबामा एट बर्मिंघम/स्पेन रिहैबिलिटेशन सेंटर

MedtronicMedtronic manufactures implantable pumps for delivery of drugs to control spasticity.

National Institute of Neurological Disorders and StrokeThe National Institute of Neurological Disorders and Stroke (NINDS) offers a GBS information page.

National Institute of Neurological Disorders and StrokeThe National Institute of Neurological Disorders and Stroke (NINDS) offers fact sheets on Spina Bifida.

National Institute of Neurological Disorders and StrokeNINDS offers fact sheets on all medical issues related to paralysis, including spasticity.

National Multiple Sclerosis SocietyNMSS offers information and resources on all medical issues related to MS including spasticity.

National Organization for Rare DisordersNORD lists numerous diseases that are accompanied by spasticity.

National Institute of Neurological Disorders and StrokeProvides research overviews for all diseases and conditions related to paralysis.

National Institute of Neurological Disorders and StrokeThe National Institute of Neurological Disorders and Stroke (NINDS) offers information pages on Syringomyelia and Tethered cord.

University of WashingtonSCI Forum Report 2003: Spasticity and Spinal Cord Injury.

We MovePosts news of clinical advances and therapeutic approaches to the management and treatment of 14 major movement disorders including spasticity.

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