ऑटोनोमिक डिसरेफलेक्सिय / Autonomic Dysreflexia

ऑटोनोमिक डिसरेफलेक्सिया (एडी) जीवन को खतरे में डालने वाली एक स्थिति है जिसे एक मेडिकल आपात स्थिति माना जा सकता है। यह मुख्यत: टी-5 या उससे ज्यादा की क्षति वाले लोगों को प्रभावित करता है।

एडी के लिए तुरंत एवं सही कार्रवाई चाहिए। गंभीर एडी से दिल का दौरा पड़ सकता है। चूंकि बहुत से स्वास्थ्यकर्मी इस स्थिति से अवगत नहीं है, एडी के जोखिम का सामना कर रहे लोंगों और उनके करीबी लोगों के लिए इसके बारे में जाना महत्वपूर्ण है।

क्या करें

अगर एडी का संदेह हो तो पहला काम यह करें कि आप बैठ जाएं, या अपने सिर 90 डिग्री पर उठाएं। अगर आप पांव नीचे कर सकते हैं तो करें। इसके बाद जो कुछ भी तंग हो उसे ढीला करें या उतार दें। सबसे महत्वपूर्ण, दिक्कत कर रहे उद्दीपक का पता करें और संभव हो तो हटाएं।

एडी के संकेतों में शामिल है:

  • उच्च रक्त चाप (200/100 से ज्यादा)
  • धमाकेदार सिरदर्द, लाल चेहरा
  • मेरूदण्डीय चोट के स्तर से ऊपर पसीना
  • नाक में सख्ती, मिचली
  • नब्ज सुस्त, प्रति मिनट 60 धड़कन से कम
  • मेरूदण्डीय चोट के स्तर से नीचे चर्मांकुरण

एडी चोट के स्तर के नीचे किसी क्षोभक से होता है, आम तौर पर आंत-मूत्राशय क्रिया से जुड़ा होता है। उसके कारणों में शामिल है:

  • मूत्राशय की भीत्ति में प्रदाह, मूत्र नली संक्रमण
  • कैथेटर में अवरोध
  • क्लेकशन बैग का ज्यादा भरा होना
  • ज्यादा फूली या प्रदाहित आंत
  • कब्ज/ठूसा होना
  • हेमोराइड या गुदा संक्रमण
  • त्वचा संक्रमण या प्रदाह, कटना, गुमटा या खरोंच
  • प्रेशर सोर (डेकुबिटस अल्सर)
  • अंदर की तरफ उगे पैर के नाखुन
  • जलना (धूप-ताम्रता, गरम पानी उपयोग करने से जलना समेत)
  • तंग या रोकने वाले कपड़े
  • यौन सक्रियता
  • रजोधर्म संबंधित ऐंठन
  • प्रसव-पीड़ा एवं प्रसव
  • उदर स्थितियां (गैस्ट्रिक अल्सर, कोलाइटिस, पेरिटोनाइटिस)
  • हड्डी टूटना

एडी को रोका जा सकता है:

  • बिस्तर/कुर्सी पर दाब घटा कर - बार बार
  • #15 सनस्क्रन उपयोग करें, जन तापमान देखें
  • आंत कार्यक्रम पर सख्ती से पालन करें
  • कैथेटर साफ रखें और कैथेटराइजेशन समयतालिका पर अमल करें

एडी की घटना में क्या होता है?

ऑटोनोमिक डिसरेफलेक्सिया का मतलब स्वायत्त तन्त्रिकीय प्रणाली - प्रणाली के उस भाग की अतिसक्रियता है जो उन चीजों को नियंत्रित करता है जैसे हृदय की धड़कन, सांस लेना, पाचन इत्यादि जिसके बारे में आपको सोंचना नहीं है। एडी तब हो सकता है जब कोई प्रदाहाक उद्दीपन चोट के स्तर के नीचे शरीर में प्रवेश कराया जाता है। उद्दीपक मेरूदण्ड को स्नायु उद्दीपन भेजता है जहां वे ऊपर की तरफ तब तक गमन करते हैं जब तक चोट के स्तर पर उन्हें ब्लॉक नहीं कर दिया जाए।

चूंकि उद्दीपन मस्तिष्क तक नहीं पहुंच सकता है, एक प्रतिवर्ती सक्रिय की जाती है जो स्वायत्त तन्त्रिकीय प्रणाली के अनुसंवेदी हिस्से की सक्रियता बढ़ा देती है। इससे ऐंठन और रक्त वाहिकाओं में संकुचन होती है जिससे रक्त चाप में वृद्धि होती है। हृदय में स्नायु अभिग्राहक और रक्त वाहिकाएं रक्त चाप में इस वृद्धि को पकड़ती हैं और मस्तिष्क को एक संदेश भेजती हैं।

मस्तिष्क उसके बाद हृदय को एक संदेश भेजता है जिससे धड़कन धीमी हो जाती है और चोट के स्तर से ऊपर की रक्तवाहिकाएं फैल जाती हैं। बहरहाल, मेरूरज्जु क्षति के चलते मस्तिक चोट के स्तर के नीचे संदेश नहीं भेज सकता, और इसीलिए रक्त चाप नियमित नहीं किया जा सकता।

दवाएं आम तौर पर तभी उपयोग की जाती है जब तकलीफ पहुंचाने वाले ट्रिगर/उद्दीपन की पहचान और उन्मूलन नहीं किया जा सकता - या जब संदिग्ध कारण के निवारण के बाद भी घटना मौजूद रहती है। उपयोगी एजेंटों में शामिल हैं: नाइट्रोग्लिसरीन, क्लोनिडाइन, हाइड्राएलाजाइन, मिनीप्रेस, कैटाप्रेस।

स्रोत: पैरालाइज्ड वेटरन्स ऑफ अमेरिका, स्पाइनल इंज्यूरीज एसोसिएशन, लंदन, नेशनल स्पाइनल कॉर्ड इंज्यूरी एसोसिएशन, मियामी प्रोजेक्ट टू क्योर पैरालिसिस/यूनिवर्सिटी ऑफ मियामी स्कूल ऑफ मेडिसिन

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