बहुविध ऊत्तक दृढ़न (मल्टीपल स्क्लेरोसिस)

बहुविध ऊतक दृढ़न (मल्टीपल स्क्लेरोसिस, एमएस) मस्तिष्क और मेरुरज्जु की विकृति है जिसमें तंत्रिका कोशिका प्रणाली पर धब्बा पड़ने के कारण तंत्रिकाओं के क्रिया-कलापों में कमी आ जाती है। बहुत-से मरीजों में लकवे के विभिन्न चरणों के लक्षण दिखाई देते हैं।

मल्टीपल स्कलेरोसिस में बार-बार सूजन आने के कारण तंत्रिका तंतुओं को ढंकने वाली माइलिन शीथ नष्ट हो जाती है और तंत्रिका कोशिकाओं के आवरण की पूरी लंबाई में जगह-जगह स्कार टिश्यू (स्क्लेरोसिस) के क्षेत्र बन जाते हैं। इससे संबंधित क्षेत्र में तंत्रिका आवेग धीमा पड़ जाता है या अवरुद्ध हो जाता है)।

अक्सर मल्टीपल स्कलेरोसिस का दौरा पड़ता है जो कुछ दिन, कुछ हफ्ते या कुछ महीने रहता है और उसके बाद परिहार का चरण आता है जिसमें रोग के लक्षण शांत पड़ जाते हैं या कोई लक्षण नहीं रह जाता। पुनरावर्तन (ठीक होकर फिर बीमार हो जाना) आम होता है।

मल्टीपल स्कलेरोसिस का सटीक कारण अज्ञात है। अध्ययनों से पता चलता है कि इसमें पर्यावरणी कारण भी शामिल हो सकते हैं। उत्तरी यूरोप, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में दुनिया के दूसरे हिस्सों के मुकाबले मल्टीपल स्कलेरोसिस के रोगी ज्यादा पाए जाते हैं। इस विकृति के लिए पारिवारिक रुझान भी ज़िम्मेदार हो सकते हैं।

समझा जाता है कि मल्टीपल स्कलेरोसिस केंद्रीय तंत्रिका प्रणाली के विरुद्ध अभिलक्षित असामान्य प्रतिरक्षी अनुक्रिया (सीएनएस) है। वास्तविक ऐंटीजेन - वे लक्षित प्रतिरक्षी कोशिकाएं जिन पर हमला करने के लिए प्रतिसंवेदित होती हैं, अभी तक अज्ञात हैं। हाल ही के कुछ सालों में शोधकर्ताओं ने हमलावर प्रतिरक्षी कोशिकाओं की शिनाख्त कर ली हैं, इसका पता लगा लिया है कि वे हमला करने के लिए सक्रिय कैसे की जाती हैं, और हमले के कुछ स्थलों, यानी आक्रमणकारी कोशिकाओं पर स्थित ग्राही स्थलों की भी शिनाख्त कर ली है जो ऐसा प्रतीत होता है कि ध्वंसात्मक प्रक्रिया शुरु करने के लिए माइलिन की तरफ आकर्षित होती हैं।

मल्टीपल स्कलेरोसिस के कारण के सिद्धांतों में विषाणु जैसे किसी सूक्ष्म जीव की भूमिका, प्रतिरक्षा प्रणाली का नियंत्रण करने वाली जीनों की विकृति या दोनों का संयोजन शामिल हैं।

लगभग एक हजार व्यक्तियों में से एक व्यक्ति एमएस से प्रभावित होता है। स्त्रियां पुरुषों की अपेक्षा ज्यादा प्रभावित होती हैं। यह विकृति अधिकतर मामलों में 20 से 40 साल की उम्र में शुरू होता है लेकिन किसी भी उम्र में प्रारंभ हो सकता हैं।

एक या एक से अधिक अग्रांगों (हाथ-पैरों) की दुर्बलता, एक या एक से अधिक अग्रांगों का लकवा, पेशीय स्तब्धता (पेशी समूहों का अनियंत्रणीय संकुचन), चलने-फिरने में अक्षमता, स्तब्धता, झुनझुनी, दर्द, दृष्टि का अभाव, संतुलन और समायोजन न होना पाना, नियंत्रण न रहना, स्मृति या विवेक की कमी, और थकान एमएस के लक्षण हैं।

हर दौरे के साथ रोग के लक्षण बदल सकते हैं। दौरा बुखार के साथ पड़ सकता है। इसी तरह गरम पानी से नहाने, धूप लगने या तनाव से भी दौरा पड़ सकता है और गंभीर हो सकता है।

अलग-अलग व्यक्तियों के एमएस के लक्षणों उसकी गंभीरता और उसके क्रम में काफी अंतर होता है। कुछ लोगों को कम दौरे पड़ते हैं और उनमें मामूली विकलांगता आती है। दूसरे लोगों में रोग घटता-बढ़ता रहता है। इसका आशय यह कि उनका सिलसिलेवार दौरे पड़ते हैं या रोग बढ़ जाता है, रोग का उभार और फिर आदमी की हालत में कुछ सुधार हो जाता है (पुनरावर्तन)

कुछ लोगों का एमएस ‘‘प्रगतिशील’’ होता है जो प्राथमिक और द्वितीयक हो सकता है। प्राथमिक प्रगतिशील एमएस से ग्रस्त मरीजों का रोग शुरू होने के बाद लगातार बढ़ता जाता है और बीच-बीच में महज मामूली सुधार आते हैं। द्वितीयक प्रगतिशील एमएस के मरीजों का रोग सिलसिलेवार घटता-बढ़ता रहता है और बीच-बीच में उनकी हालत में सुधार आता रहता है लेकिन समय बीतने के साथ रोग लगातार बढ़ता जाता है और मरीज की हालत बदतर होती जाती है। एमएस के ज्यादातर मरीजों का रोग घटने-बढ़ने वाला, यानी द्वितीयक प्रगतिशील किस्म का होता है। मल्टीपल स्क्लेरोसिस का कोई ज्ञात इलाज नहीं है।

कुछ नई संभावना संपन्न चिकित्साएं जरूर हैं जो इस रोग की पीड़ा को कम करती और रोग के बार-बार आने को विलंबित करती हैं। लक्षणों को नियंत्रित करना और मरीज के जीवन की गुणवत्ता में अधिकतम सुधार लाने के लिए उसके क्रिया-कलापों को बहाल रखना इलाज का उद्देश्य होता है। उपशमन-पुनरावर्तन क्रम के एमएस के मरीजों को अब इम्यून मोड्यूलेटिंग थेरेपी दी जाती है जिसमें त्वचा में या पेशियों में हफ्ते में एक या कई बार इंजैक्शन लगाने पड़ते हैं। इंटरफेरान (जैसे, एवोनेक्स या बीटासेरोन) या ग्लेटिरेमर एसिटेट (कोपैक्सन) के इंजैक्शन लगाए जाते हैं। ये दवाइयां समान रूप से प्रभावी हैं और किसका उपयोग किया जाए, इसका फैसला उनके प्रतिकूल प्रभावों के मद्देनजर किया जाता है। रोग के दौरे की गंभीरता को कम करने के लिए अक्सर स्टेरायड दिये जाते हैं। एमएस की दूसरी सामान्य दवाओं में बेक्लोफेन, टिजानिडिन शामिल हैं या पेशी ऐंठन कम करने के लिए डायजेपाम भी दी जा सकती है। मूत्र संबंधी समस्याओं के समाधान में कोलिनेर्जिक दवाइयां कारगर हो सकती हैं। चिड़चिड़ेपने और अवसाद की शिकायत दूर करने में अवसाद रोधी दवाएं कारगर हो सकती हैं। थकान दूर करने के लिए एमांटिडीन दी जा सकती है।

शारीरिक उपचार, बोलने संबंधी चिकित्सा और व्यावसायिक चिकित्सा व्यक्ति की रूप-रंग में सुधार ला सकती है, अवसाद कम कर सकती है, उसकी सक्रियता बढ़ा सकती है और हालात का सामना करने की कुशलता में सुधार ला सकती है। एमएस के शुरुआती चरण में नियोजित ढंग से व्यायाम करने से पेशियों का कसाव बनाए रखने में मदद मिल सकती है। थकान, तनाव, शारीरिक ह्रास, अत्यधिक गर्मी-सर्दी, और बीमारियों से बचाव के प्रयास किये जाने चाहिए ताकि उन कारकों को टाला जा सके जिनकी वजह से एमएस का दौरा पड़ सकता है।

अपेक्षित परिणाम अलग-अलग होते हैं और उनके बारे में पूर्वानुमान नहीं लगया जा सकता। हालांकि यह बीमारी दीर्घकालिक और लाइलाज है, जीवित रहने की संभावना सामान्य या लगभग सामान्य होती है और आम तौर पर रोग का निदान होने के बाद मरीज 35 साल या उससे लंबी उम्र जीते हैं। एमएस के ज्यादातर मरीज़ 20 साल या उससे लंबे अरसे तक चलते-फिरते और अपना काम-काज करते रहते हैं।

स्रोत: नेशनल इन्स्टीट्यूट ऑफ़ न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर्स एंड स्ट्रोक (एनआईएनडीएस), नेशनल मल्टीपल स्क्लेरोसिस सोसाइटी, कंसोर्टिम ऑफ़ एमएस सेंटर्स

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