सिरिंजोमेलिया /टीथर्ड कोर्ड / Syringomyelia / Tethered Cord

मेरूरज्जु चोट के उपरांत पोस्ट-ट्रामेटिक सिरिंजोमेलिया/टीथर्ड कोर्ड हो सकता है। यह चोट के दो माह बाद से लेकर अनेक दशक बाद तक हो सकता है। इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं, जिसमें लंबे समय पहले सफल स्वास्थ्यलाभ कर चुके व्यक्ति में नये स्तर की अपंगता देखने को मिल सकती है। सिरिंजोमेलिया/टीथर्ड कोर्ड के लिये क्लीनिक्ल लक्षण वही हैं और इसमें मेरूरज्जु में विकृति, संवेदना एवं शक्ति में ह्रास, भारी मात्रा में पसीना आना, स्पेस्टीसिटी, दर्द तथा आटोनोमिक डाइसरेफलेक्सिया (एडी) शामिल हैं।

अभिघातज-बाद या पोस्ट-ट्रामेटिक के सिरिंजोमेलिया में कोर्ड या रज्जु के भीतर ही द्रव से भरा गुहिका बन जाती है। यह गतिविधि समय के साथ विस्तृत हो सकती है। एससीआई के स्तर से दो या अधिक मेरू खंडों में।

टीथर्ड कोर्ड वह स्थिति है जब क्षतिग्रस्त या स्कार ऊत्तक बनते हैं और डयूरा में मेरूरज्जु को जकड़ या बांध देते हैं। डयूरा यानी वह नरम ऊत्तक झिल्ली जो इसके चारों और होती है। इस स्कार ऊत्तक मेरूरज्जु के चारों ओर मेरू द्रव के सामान्य प्रवाह को रोकते हैं और झिल्ली के भीतर ही मेरूरज्जु के सामान्य परिचालन को बाधित करते हैं। टीथरिंग के कारण सिस्ट या कृमिकोष बनता है। टीथर्ड रज्जु, सिरिंजोमेलिया के बिना भी हो सकती है, लेकिन अभिघात-बाद कृमिकोष निर्माण रज्जु टीथरिंग की कुछ डिग्री के बिना नहीं होता।

मैग्नेटिक रेसोनेंस इमेजिंग (एमआरआई) मेरूरज्जु में कृमिकोष को आसानी से पकड़ लेती है अगर प्लेट्स या बुलेट अंश मौजूद नहीं हो।

पोस्ट ट्रामेटिक टीथर्ड कार्ड तथा सिरिंजोमेलिया का इलाज शल्य चिकित्सा द्वारा होता है। अनटीथरिंग में एक महीन शल्य क्रिया होती है जिसके जरिये मेरूरज्जु के आसपास के स्कार ऊत्तकों को अलग कर दिया जाता है और मेरू द्रव प्रवाह तथा मेरू रज्जु गतिविधियों को बहाल किया जाता है। इसके अतिरिक्त टीथरिंग साईट पर एक छोटा सा आरोपण, ग्राफ्ट किया जाता है ताकि डयूरल स्पेस की किलेबंदी करते हुए रि-स्कार के जोखिम को कम किया जा सके। अगर सिस्ट मौजूद है तो एक ट्यूब या शंट को गुहिका के अंदर रख दिया जाता है ताकि सिस्ट के द्रव की निकासी की जा सके। शल्य क्रिया से सामान्य ताकत बढती है और सुधार होता है; इससे हमेशा ही गायब संवेदक क्रियाकलाप वापस नहीं आ जाते।

यूनिवर्सिटी आव फ्लोरिडा में प्रयोगों में, मेरूरज्जु सिस्ट का ईलाज फेटल ऊत्तकों के टीकों से किया गया। इसकी कोई संभावना नहीं है कि इस तकनीक को निकट भविष्य में क्लीनिक में जगह मिलेगी। लेकिन ऊत्तक विकास कर सकते हैं और ये गुहिकाओं को भर सकते हैं

ताकि कामकाज में आगे कोई नुकसान को रोका जा सके।

सिरिंजोमेलिया उन लोगों में भी होता है जिनमें मस्तिष्क की जन्मजात असामान्यता होती है जिसे छियारी मेलफोर्मेशन कहा जाता है। इन असामान्यताओं में- भ्रूण के विकास के दौरान अनुमस्तिष्क सिर के पीछे से बाहर निकल आता है, मेरूरज्जु के ग्रीवा वाले भाग में। इसके लक्षणों में उल्टी, सिर एवं चेहरे में मांसपेशी कमजोरियां, निगलने में परेशानी तथा मानसिक या की विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं। हाथों एवं पैरों को लकवा भी हो सकता है। छियारी मेलफोर्मेशन वाले वयस्कों तथा किशोरों में जिनमें पहले कोई लक्षण नहीं दिखा हो, उनमें सतत बढता नुकसान नजर आ सकता है जैसे कि आंखों का अनैच्छिक, तीव्र गति से मिचमिचाना। इसके अलावा सिर दर्द, एक ही चीज दो दिखाई देना, बहरापन तथा आंखों के आसपास भयंकर दर्द भी इसके लक्षणों में शामिल है।

सिरिंजोमेलिया को सिप्ना बाइफिडा, मेरूरज्जु गांठ, आर्चनोडिटीज एवं इडियोपेथिक (कारण अज्ञात) सिरिंजोमेलिया से भी जोड़ा जा सकता है। एमआरआई से सिरिंजोमेलिया की शुरुआत में निदानों की संख्या में उल्लेखनीय बढोतरी करती है। डिसआर्डर के लक्षण धीरे धीरे सामने आते हैं लेकिन खांसी या के साथ अचानक हमला हो सकता है।

शल्य क्रिया से लक्षणों में स्थिरता या मामूली सुधार सभी लोगों में दिखता है। इलाज में देरी का परिणाम स्थाई मेरूरज्जु चोट हो सकती है। शल्य चिकित्सा के बाद सिया का रिकरेंस अतिरिक्त आपरेशन को अनिवार्य कर सकता है; ये आपरेशन लंबे समय में सफल नहीं रहते हैं। सि का इलाज लेने वाले आधे लोगों में पांच साल में लक्षण लौटने लगते हैं।

स्रोत : नेशनल इंस्टीटयूट आफ न्यूरोलाजिक्ल डिसआर्डर्स एंड स्ट्रोक, अमेरिकन सिरिंजोमेलिया एलायंस प्रोजेक्ट
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