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रीव फ़ाउंडेशन का इतिहास

आंदोलन की चिंगारी

फोटोग्राफर टिमोथी ग्रीनफ़ील्ड-सैंडर्स

क्रिस्टोफ़र एवं डाना रीव फ़ाउंडेशन की जड़ें 1982 तक जाती हैं जब न्यू जर्सी का एक हाई स्कूल विद्यार्थी हेनरी स्टिफ़ेल (Henry Stifel) 17 वर्ष की आयु में एक कार दुर्घटना के कारण लकवे से ग्रस्त हो गया था।

समुदाय द्वारा संचालित स्टिफ़ेल पैरलिसिस रिसर्च फ़ाउंडेशन के रूप में आरंभ हुई एक संस्था, एक ही मिशन पर काम करने वाले कई अन्य संगठनों के जुड़ जाने पर अमेरिकन पैरालिसिस एसोसिएशन (APA) बन गई और उनका वह एक मिशन था इस धारणा को चुनौती देना कि रीढ़ की हड्डी के चोटिल हो जाने पर उसे वापस कभी-भी बहाल नहीं किया जा सकता या उसकी मरम्मत नहीं की जा सकती है।

APA के संस्थापकों का यह अडिग विश्वास था कि शोधकर्ता और तंत्रिका वैज्ञानिक साथ कार्य करके उन क्षतिग्रस्त तंत्रिकाओं और कोशिकाओं को जोड़ने और उनका पुनर्जनन करने का कोई-न-कोई तरीका ढूंढ निकालेंगे जिनके कारण लकवा होता है।

1995 में, जब क्रिस्टोफ़र रीव को चोट लगी, तो APA उन कुछ शुरुआती स्थानों में से एक था जहां क्रिस्टोफ़र और डाना मदद के लिए गए थे। जैसा कि क्रिस्टोफ़र ने कहा था, “मैं हमेशा से उन उद्देश्यों के पक्ष में लड़ने वाला योद्धा रहा हूं जिनमें मैं विश्वास करता हूं। इस बार, एक उद्देश्य ने मुझे ढूंढ लिया है।” 1999 में, APA और क्रिस्टोफ़र का फ़ाउंडेशन मिलकर क्रिस्टोफ़र रीव फ़ाउंडेशन बन गए, और मार्च 2006 में डाना की असमय मृत्यु हो जाने के बाद उनका नाम भी इस फ़ाउंडेशन के नाम में जुड़ गया।

द मैन ऑफ़ स्टील

क्रिस्टोफ़र रीव का जन्म न्यू यॉर्क शहर में 25 सितंबर, 1952 को हुआ था। 1955 में वे और उनका परिवार न्यू जर्सी के प्रिंसटन रहने आ गए, जहां उन्होंने एक भरा-पूरा बचपन बिताया। क्रिस्टोफ़र स्कूल के बाद पढ़ाई के लिए पहले कॉरनेल यूनिवर्सिटी गए, और फिर जुलियार्ड ड्रामा स्कूल।

क्रिस्टोफ़र में ड्रामा की जो जन्मजात प्रतिभा थी उसके कारण उन्हें थिएटर, टेलीविज़न और सुनहरे पर्दे पर बहुत सारी भूमिकाएं मिलीं। हालांकि यह दुनिया सुपरमैन की उनकी अविश्वसनीय भूमिका के लिए उन्हें जानती है, पर जो उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानते हैं वे उन्हें एक उम्दा अभिनेता से बहुत कुछ अधिक होने के लिए याद करते हैं।

क्रिस्टोफ़र रीव एक असाधारण पिता, एक प्रेमपूर्ण पति, एक मानवाधिकार पक्षधर, एक उत्साह से भरे साहसी व्यक्ति, एक पर्यावरणविद, एक लेखक, एक निर्देशक, और एक निपुण पियानो वादक थे। वे एक पायलट भी थे और उन्होंने एटलांटिक के आर-पार दो एकल यात्राएं की थीं; उन्हें प्रकृति की गोद में अठखेलियां करना पसंद था और वे स्कीइंग करते थे, नावें चलाते थे, स्कूबा डाइविंग करते थे, टेनिस खेलते थे, और जंगली बियाबानों में अकेले चप्पूदार डोंगियां चलाया करते थे।

1985 में 33 वर्ष की आयु में क्रिस्टोफ़र ने घुड़सवारी शुरू की और 1989 आते-आते वे प्रतिस्पर्धाओं में हिस्सा लेने लगे, जिनमें क्रॉस-कंट्री जम्पिंग भी शामिल थी।

27 मई, 1995

एक सेकंड से भी कम समय में घट जाने वाली घटनाओं का अनुभव करने वाले लोगों के लिए वे इस प्रकार घटती हैं मानो स्लो-मोशन में कोई वीडियो चल रहा हो। वह ऐसा ही एक कौंधता हुआ पल था जब एक सुगठित और मजबूत कदकाठी वाले क्रिस्टोफ़र रीव रीढ़ की हड्डी की एक इतनी गंभीर चोट के कारण लकवाग्रस्त हो गए कि उनके मन में सबसे पहले यह विचार आया कि उनका मर जाना वहां मौजूद सभी के लिए बेहतर रहेगा।

जब डाना ने मेरी जान बचाने वाले वो शब्द मेरे कान में कहे, ‘आप अभी-भी आप हैं। और मैं आपसे प्यार करती हूं,’ तो मेरे लिए वे शब्द, विश्वास और प्रतिबद्धता की एक व्यक्तिगत घोषणा से कहीं अधिक थे। एक तरह से यह इस बात की दावे के साथ पुष्टि थी कि विवाह और परिवार ही हर चीज़ के केंद्र में होते हैं, और यदि वे दोनों सही-सलामत हैं, तो आपकी दुनिया भी सही-सलामत है।

– क्रिस्टोफ़र रीव

इन शब्दों के साथ, क्रिस्टोफ़र ने जीवन को चुना। कई महीनों के दुष्कर पुनर्सुधार और चिकित्सा के बाद, जब क्रिस्टोफ़र घर लौटे तो उन्होंने अपने इर्द-गिर्द के जीवन को पूरी तरह परिचित, पर फिर भी एकदम नया पाया।

“मैंने मेरे नए जीवन का सामना करना शुरू किया। 1995 के थैंक्सगिविंग पर मैं घर गया और अपने परिवार के साथ दिन बिताया। ड्राइववे में जब मैंने हमारे घर को दोबारा देखा, तो मैं रो पड़ा। डाना ने मुझे थामा। डिनर टेबल पर जब हम सभी ने इस बारे में कुछ शब्द बोले कि हम किन चीज़ों के लिए आभारी हैं, तो 3 वर्ष के नन्हे विल ने कहा, ‘डैड के लिए’।”

एक नया उद्देश्य

क्रिस्टोफ़र रीव की उदारता की भावना असीमित थी और उनके संपर्क में आने वाले सभी लोगों में वह प्रतिध्वनित होती थी। उन्होंने अपने कार्य के प्रति अपने उत्साह के जरिए, और अपना जीवन जीने का जो तरीका उन्होंने चुना था उसके जरिए, अपना शौर्य हमें दिखा दिया था। किसी ने नहीं सोचा था कि वे रीढ़ की हड्डी की चोट के पोस्टर-चाइल्ड बन जाएंगे, पर वे जानते थे कि वे सभी की भलाई के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकते हैं।

“मुझे कुछ करने की ज़रूरत महसूस हुई – केवल मेरे लिए नहीं बल्कि मेरी जैसी स्थिति से ग्रस्त हर किसी के लिए। मैं चाहकर भी उन रोगियों को नहीं भुला सकता जिनसे मैं पुनर्सुधार के दौरान मिला था (और मैंने उन्हें भुलाना चाहा भी नहीं)। मैंने उनके इतने संघर्ष और इतना दर्द देखा कि क्या कहूं। मुझसे ये नहीं हो सकता था कि मैं घर चला जाऊं, अपने जीवन को खुद के लिए और मेरे परिवार के लिए समर्पित कर दूं, और जो विस्तृत दुनिया है उसे अनदेखा कर दूं।”

घर लौटने के बाद जल्द ही उन्होंने यह तलाश शुरू कर दी कि वे वैज्ञानिक जगत को ज़्यादा तेज़ी से और ज़्यादा कड़ी मेहनत करने का आग्रह करने के लिए; रोगी समुदाय की आवाज़ सुनी जाए और उनकी जीवन की गुणवत्ता बेहतर हो इस उद्देश्य में सहायता देने के लिए; और कानून बनाने वालों को रीढ़ की हड्डी की चोट के क्षेत्र में अनुसंधान करने के लिए संघीय वित्तपोषण बढ़ाने हेतु प्रभावित करने के लिए किन-किन तरीकों से अपने नाम, अपनी प्रसिद्धि और अपनी आवाज़ का उपयोग कर सकते हैं।

अनुसंधान और जीवन की गुणवत्ता

क्रिस्टोफ़र पारंपरिक समझ से कहीं ऊपर थे। अपने साहस, दृढ़संकल्प, अंतरराष्ट्रीय ख्याति, और ‘कुछ भी असंभव नहीं’ में अपने अडिग विश्वास के फलस्वरूप क्रिस्टोफ़र ने सागर जितने बड़े बदलाव की शुरुआत की।

उनके नेतृत्व के जरिए, क्रिस्टोफ़र एवं डाना रीव फ़ाउंडेशन का जन्म हुआ और उसने दिन-दूनी-रात-चौगुनी वृद्धि करते हुए रीढ़ की हड्डी की मरम्मत की अनुसंधान की दुनिया को नया आकार दिया। उनके मार्गदर्शन में, रीव फ़ाउंडेशन के अनुसंधान कार्यक्रम तीन गुने हो चुके हैं और उनमें बेहद मूलभूत विज्ञान (आण्विक और कोशिकीय शोध) से लेकर नैदानिक अनुप्रयोग (आशाजनक चिकित्साओं का परीक्षण करना और उन्हें रोगियों तक पहुंचाना) तक शामिल हैं। उन्होंने जिस संवेग को चिंगारी दी है उसके साथ कंधे से कंधा मिलकर चलने के मामले में अनुसंधान के लिए वित्तपोषण अधिकांशतः कम ही रहता है।

क्रिस्टोफ़र ने एक रोगी पक्षधर के रूप में संसद के सामने प्रस्तुत होकर संघीय स्तर पर अनुसंधान को मिलने वाले वित्तपोषण और ध्यान को बढ़ाने की लड़ाई लड़ी। और उत्कट अनुसंधान के जारी रहते डाना रीव ने विकलांगता की दिन-प्रतिदिन की चुनौतियों का सामना करते हुए जी रहे लोगों के लिए जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने की दिशा में कार्य कर रहे संगठनों की सहायता के लिए जीवन की गुणवत्ता अनुदान कार्यक्रम की स्थापना कर दी।

अलग-अलग लोगों की जीवन की गुणवत्ता संबंधी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए, क्रिस्टोफ़र और डाना ने मिलकर पक्षाघात संसाधन केंद्र (पैरालिसिस रिसोर्स सेंटर, PRC) की स्थापना की। PRC अपनी तरह का पहला केंद्र है और यह दुनिया भर के उन लोगों को लकवे से संबंधित जानकारी प्रदान करता है जो यह जानकारी जानने की कोशिशों में हताशा के कगार पर पहुंच गए हैं; इस जानकारी में अनुसंधान के अग्रणी प्रयासों के नवीनतम समाचार, उपकरणों और सहयोग समूहों के स्रोत, तथा बीमा एवं सरकारी अफ़सरशाही से जुड़े ढेर सारे प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं।

क्रिस्टोफ़र और डाना रीव जैसी टीम आज से पहले कभी नहीं थी – जिसे उसकी साझेदारी के लिए पेशेवर और व्यक्तिगत, दोनों स्तरों पर इतना पूजा जाता है और इतना प्यार किया जाता है।

एक ऐसी विरासत जो किसी सुपरहीरो की ही हो सकती है

रीव फ़ाउंडेशन के माध्यम से क्रिस्टोफ़र ने जो विरासत छोड़ी है वह मजबूत और चिरस्थायी है। इस बात को गले से उतारना कितना कठिन है कि जिस व्यक्ति ने अपने जीवन का अंतिम दशक क्वाड्रीप्लेजिया (दोनों बांहों, दोनों पैरों और धड़ के लकवे) से ग्रस्त होकर वेंटिलेटर पर निर्भर रहते हुए गुजारा, वह दुनिया बदल सकता है। और इस कारण से हम तब भी उनके साहस से विस्मित थे और आज भी हैं।

“जब पहली सुपरमैन फ़िल्म रिलीज़ हुई थी तो उसके प्रचार के लिए मैंने दर्ज़नों साक्षात्कार दिए थे। सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न था: हीरो क्या होता है? मेरा उत्तर यह था कि हीरो वह होता है जो परिणामों की चिंता किए बिना कोई साहसिक कार्य करता रहता है। पर अब मेरी परिभाषा पूरी तरह बदल चुकी है। मुझे लगता है कि हीरो एक ऐसा साधारण व्यक्ति होता है जो उसे लाचार कर देने वाली परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य से न डिगने और टिके रहने की शक्ति को ढूंढ निकालता है। वह ही असली हीरो होता है, और वे परिवार और मित्र भी हीरो होते हैं जो उसके साथ खड़े रहते हैं।”

10 अक्तूबर, 2004 को क्रिस्टोफ़र रीव का देहांत हो गया। मात्र 52 वर्ष की आयु में दुनिया से उनका प्रस्थान, समय से बहुत-बहुत पहले था। पूरी दुनिया ने उनकी मृत्यु का शोक मनाया, और हम सभी ने उन यादों पर सोच-विचार किया जो वे हम सभी के लिए पीछे छोड़ गए हैं।

हर अक्तूबर में जब उनकी पुण्य तिथि समीप आती है, तो हम सभी को इस बात पर सहमत करा जाती है कि: क्रिस्टोफ़र रीव से बढ़कर एक सच्चे हीरो का प्रतीक कोई नहीं है। इस बात की इतनी आशा और सकारात्मकता पहले कभी नहीं थीं कि रीढ़ की हड्डी की चोटों के इलाज़ और उपचार मिल पाएंगे।

क्रिस्टोफ़र ने यह बात पहचानी कि संवेग हमारे पक्ष में है, और यह बात उनकी विरासत को और प्रामाणिक व सुदृढ़ बनाती है कि दुनिया भर में लकवे के साथ जी रहे लाखों-करोड़ों लोगों की ओर से हम उनकी यात्रा जारी रखे हुए हैं। यह हमारा सौभाग्य है कि हमें उनकी विरासत को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है, और उनकी याद में हम एक होकर आगे बढ़ने का संकल्प लेते हैं।