एमियोट्रोफिक लैटरल स्लेरोसिस / Amyotrophic Lateral Sclerosis

एमियोट्रोफिक लैटरल स्लेरोसिस (एएलएस) या लोउ गेहरिग रोग एक बढ़ता तत्रिंकीय रोग है जो 30,000 अमेरिकियों को प्रभावित कर रहा है और अमेरिका में हर साल 5,000 नए मामले सामने आ रहे हैं।

एएलएस मोटर न्यूरोन रोगों के नाम से ज्ञात विकारों के एक वर्ग से आता है। मोटर न्यूरोन स्नायु कोशिकाएं हैं जो मस्तिष्क, मस्तिष्क स्तंभ और मेरूरज्जु में स्थित होती हैं और तंत्रिका प्रणाली तथा शरीर के ऐच्छिक मांसपेशियों के बीच नियंत्रणकारी इकाइयों एवं महत्वपूर्ण संचार संपर्क के रूप में काम करती हैं। इन कोशिकाओं की क्षति से उनके नियंत्रण वाली मांसपशियां कमजोर और खत्म हो जाती हैं जिससे लकवा होता है। यह निदान के पांच साल के भीतर मारक होता है।

एएलएस इस आधार पर खुद के विभिन्न रूपों में प्रदर्शित करता है कि कौन सी मांसपेशी पहले कमजोर पड़ती है। लक्षणों में लड़खड़ाहट और गिरना, हाथों और बाजुओं में नियंत्रण खत्म होना, बोलने में दिक्कत, निगलने और/या सांस लेने में दिक्कत, लगातार थकान, और ऐंठन तथा मरोड़ शामिल हो सकते हैं। एएलएस जीवन के मघ्य में हमला करता है। पुरूषों में इसके होने की आशंका महिलाओं के मुकाबले डेढ़ गुना ज्यादा होती है।

चूंकि एएलएस केवल मोटर न्यूरोन को प्रभावित करता है, रोग व्यक्ति के दिमाग, व्यक्तित्व, बुद्धि या याददाश्त को प्रभावित नहीं करता। यह किसी व्यक्ति के देखने, सूंघने, स्वाद लेने, सुनने या स्पर्श पहचानने की क्षमता को प्रभावित नहीं करता। रोगी आम तौर पर आंखों की मांसपेशियों, मूत्राशय और आंतों की क्रियाओं पर नियंत्रण कायम रखता है।

एएलएस का कोई इलाज नहीं है, ना ही कोई सिद्ध उपचार है जो इसे रोक या उलट सकता हो। फुड एंड ड्रग ऐडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने हाल ही में राइलुजोल को मंजूरी दी है जो पहली दवा है जिसे एएलएस रोगियों का जीवन बढ़ाते पाई गई। माना जाता है कि राइलुजोल ग्लुटामेट के रिलीज को घटा कर मोटर न्यूरोन की क्षति में कटौती लाती है। क्लिनिकल परीक्षणों ने दिखाया है कि राइलुजोल खास कर निगलने में दिक्कत महसूस करने वाले लोगों में जीवन को कई माह बढ़ाती है। यह दवा किसी व्यक्ति की कृत्रित श्वास समर्थन की आवश्यकता से पहले का समय भी बढ़ाती है। मोटर न्यूरोन को जो क्षति पहुंच चुकी है, राइलुजोल उसे उलटती नहीं है, और दवा का सेवन कर रहे रोगियों पर यकृत की क्षति और अन्य संभावित साइड इफेक्ट के लिए निगाह रखी जानी चाहिए।

एएलएस के पूरे काल में भौतिक चिकित्सा एवं विशेष उपकरण स्वतंत्रता और सुरक्षा बढ़ा सकते हैं। टहलना, तैराकी और खड़ी साइकिल चलाने जैसी निम्न प्रभाव वाली एयरोबिक कसरत अप्रभावित मांसपेशियों को मजबूती प्रदान कर सकती है, हृद-वाहिका स्वास्थ्य सुधार सकती है और थकान तथा अवसाद से संघर्ष करने में रोगियों की मदद कर सकती है। गति एवं खिंचाव वाली कसरतें दुखद स्पैस्टिसिटी और मांसपेशियों के संकुचन को रोकने में मदद कर सकती है। ऑक्यूपेशनल थेरापिस्ट रैंप, बंधनी, वाकर और व्हीलचेयर जैसे उपाय सुझा सकते हैं जो रोगियों को अपनी ऊर्जा संरक्षित रखने और गतिशील बने रहने में मदद कर सकता है।

सांस लेने में मदद करने वाली मांसपेशियों के कमजोर होने से श्वास सहायता (इंटरमिटेंट पॉजिटिव प्रेशर वेंटिलेशन) [IPPV] या बाईलेवल पॉजिटिव एयरवे प्रेशर [BIPAP]) का उपयोग सोते समय श्वास में सहायता के लिए किया जा सकता है। जब मांसपेशियां आक्सिजन और कार्बन डायक्साइड स्तर को बनाए रखने में सक्षम नहीं रह जाती, इन उपकरणों को पूरे समय उपयोग किया जा सकता है।

सामाजकर्मी और होमकेयर एव हॉसपिस नर्स रोगियों, परिवारों, और सेवादाताओं को एएलएस से जूझने के क्रम में, खास कर रोग के अंतिम चरण में मेडिकल, भावनात्मक एवं वित्तीय चुनौतियों से निबटने में मदद करते हैं। समाजकर्मी वित्तीय सहायता हासिल करने, टिकाऊ पावर ऑफ अटार्नी लेने, वसीयत बनाने, और रोगियों तथा सेवादाताओं के लिए समर्थन समूह तलाश करने में सहायता करते हैं।

स्रोत:
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन न्यूरोलॉजिकल डिसआर्डर्स एंड स्ट्रोक, एएलएस एसोसिएशन

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