व्हीलचेयर्स, सीटिंग, पोजीशनिंग / Wheelchairs, Seating, Positioning

आमतौर पर कही जाने वाली बात गलत है : लोग अपनी व्हीलचेयर्स तक ''कैद'' नहीं हैं - असल में वे अपनी पहियों के द्वारा मुक्त हो गये हैं। पक्षाघात वाला कोई व्यक्ति उतनी ही तेजी से अपने आसपास चल सकता है जितना कि कोई दूसरा चल सकता है। व्हीलचेयर लोगों को काम या शापिंग या घर के बाहर किसी अन्य यात्रा तक पहुंच प्रदान करती है। कुछ लोगों के लिए, व्हीलचेयर लोगों को दौड़ों, बास्केटबॉल, टेनिस और अन्य खेलों में भाग लेने में समर्थ बनाती है। कई एक ढंग से व्हीलचेयर साइकिल की भांति होती है - इम्पोर्ट्स, रेसिंग मॉडल्स आदि समेत चुनने के लिए बहुत सी डिजाइनें एवं स्टाइल्स हैं। इसके अलावा चेयर एक जोड़ा जूते जैसे होती है - स्पोर्ट्स या रग्ड ट्रेल यूज जैसे विशेष उद्देश्यों के लिए मॉडल्स हैं लेकिन अगर वे पूरी तरह से फिट नहीं हैं तो यूजर को आराम नहीं मिल सकता या वह अधिकतम प्रकार्य हासिल नहीं कर सकता। सही कुर्सी का चुनाव, खासकर पहली बार के व्हीलचेयर प्रयोक्ता के लिए दिग्भ्रमित करने वाला हो सकता है। ऐसे पेशेवर थेरेपिस्ट के साथ काम करना हमेशा अच्छा होता है जिसके पास विभिन्न प्रकार की व्हीलचेयर्स के साथ काम करने का अनुभव हो, अलबत्ता व्हीलचेयर्स पर गतिशीलता के कुछ मूलभूत नियम होते हैं।

मैनुअल चेयर्सशरीर के ऊपरी हिस्से में ताकत रखने वाले ठेठ तौर पर मैनुअल चेयर का प्रयोग करते हैं - वे पहियों की रिमों पर अपनी बांहों से उसे चलाते हैं। एक पीढ़ी पहले स्टैंडर्ड चेयर क्रोम के प्लेट वाली बेहेमोथ थी जिसका वजन तकरीबन 50 एलबीएस था। आज की स्टैंडर्ड चेयर हर उस रंग में आती है जिसके बारे में आप सोच सकते हैं और यह उस वजन के आधे से भी बहुत कम होती है और उनकी डिजाइन काफी उम्दा प्रदर्शन लिए होती है। नयी चेयर्स सचमुच भागती हैं और गुजरे वर्षों के क्लंकर्स के मुकाबले धकेलने में काफी आसानी होती हैं। हल्का वजन फिर वह चाहे रिजिड फ्रेम में हो या फोल्डिंग फ्रेम में, कार के अंदर व बाहर करने के लिए भी काफी आसान होता है।

पावरबहुत से लोग अपनी खुद की बांह की ताकत से व्हीलचेयर को धक्का नहीं दे सकते और उन्हें बैटरियों से चलने वाली व्हीलचेयर की आवश्यकता पड़ती है। पावर चेयर्स बहुत सी बेसिक स्टाइलों में आती है। पारंपरिक स्टाइल स्टैंडर्ड मैनुअल के सुधरे हुए रूप जैसी जान पड़ती है जिसमें बैटरियां, मोटर और कंट्रोल सिस्टम्स होता है। इसके अलावा प्लेटफार्म-मॉडल पावर चेयर्स होती हैं जिनकी सीट कहीं अधिक साधारण होती है और जिनके ऊपर पावर वाला बेस फिक्स होता है। तीन और चार पहियों के विन्यासों में स्कूटर आते हैं और ऐसे लोग ठेठ तौर पर उनका प्रयोग करते हैं जिन्हें उनकी पूरे समय जरूरत नहीं होती।

अभी कुछ वर्ष पहले तक पावर चेयर मार्केट महज कुछ ब्रांडों एवं मॉडल्स तक सीमित थी। नवोन्मेष ने विकल्पों को विस्तारित किया है, हालांकि ज्यादा हल्की, ज्यादा शक्तिशाली और कहीं अधिक तेज चेयर्स के साथ। चूंकि पावर चेयर्स अक्सर काफी मंहगी होती हैं तो भरपाई एक अहम मुद्दा होता है। बेहतरीन सेटअप प्राप्त करने के लिए अपनी फंडिंग के स्रोतों, ओटी, सीटिंग विशेषज्ञों और रिहैब सप्लायरों के साथ काम कीजिए।

चाइल्ड/जूनियर चेयर्स

क्योंकि उनके शरीर बढ़ रहे और परिवर्तित हो रहे होते हैं इसलिए बच्चों एवं किशोरों की चेयर्स वयस्कों की चेयर्स के मुकाबले ज्यादा अधिक बार बदलनी या रिप्लेस करनी होती है। चूंकि कुर्सियां सस्ती नहीं होतीं और बीमाकर्ता अक्सर रिप्लेसमेंट पर सीमाएं लगाते हैं इसलिए विनिर्माता ऐसी चेयर्स मुहैया कराते हैं जिन्हें कि बढ़ते हुए बच्चे के हिसाब से समायोजित किया जा सके। व्हीलचेयर कंपनियां भी ऐसी चेयर्स मुहैया कराती हैं जो कि पुरानी स्टाइल की तरह उतनी ''मेडिकल'' नहीं दिखायी पड़तीं। इसमें ज्यादा सरल एवं कारगर डिजाइनें और कूलर अपहोल्स्टेरि और/ या फ्रेम कलर्स शामिल हैं।

पक्षाघात वाले लोगों को दबाव जख्म होने का ज्यादा खतरा रहता है और इसलिए उन्हें विशेष कुशनों और सीटिंग सिस्टम्स की आवश्यकता पड़ती है ताकि त्वचा को कुछ राहत दी जा सके। तीन मूलभूत प्रकार की कुशन सामग्री होती है, कतिपय प्रकार के यूजर्स के लिए हरेक के लाभ होते हैं : एअर, फोम या लिक्विड (अर्थात, जेल)। यह तय करने के लिए अपनी सीटिंग विशेषज्ञ के साथ काम कीजिए कि आपके लिए कौन सी ठीक है।

झुकाव या रिक्लाइन

कुछ लोग दबाव को वितरित करने और इस प्रकार त्वचा के घावों के खतरे को कम करने के लिए विशेष व्हीलचेयर्स का प्रयोग करते हैं। ये कुर्सियां इसके अलावा आराम एवं बैठने की सहिष्णुता में वृद्धि करती हैं। ''टिल्ट इन स्पेस'' कही जाने वाली एक प्रकार की कुर्सी स्थिर कूल्हे, घुटने और टखने के कोणों को बनाये रखते हुए व्यक्ति के अभिमुखीकरण को परिवर्तित करती है। अमल में समूची सीट हिलती-डुलती है। चेयर का दूसरा विकल्प रिक्लाइन सिस्टम कहलाता है, जो कि मूलत: सीट से पीठ के कोण को बदलता है, चेयर की पीठ को फैला देता है और कुछ मामलों में चपटी सतह निर्मित करने के लिए टांगों को उठा देता है।

टिल्ट प्रणाली चूतड़ और पीछे की जांघों से दबाव को पीछे के ट्रंक एवं सिर पर फिर से वितरित करता है। यह प्रणाली अवस्थिति को बनाये रखती है और शीअर (सतह पर घिसटने से ऊतकों पर घर्षण) को रोकती है। खामी : उदाहरण के लिए यूजर अगर वर्कस्टेशन पर बैठता है तो टिल्ट के लिए यह आवश्यकता पड़ती है कि वह टेबल से पीछे की ओर गति करे ताकि उठे हुए पायदानों के साथ टेबल को टकराने से बचाया जा सके।

रिक्लाइन सिस्टम्स सीट से पीठ के कोण को खोल देती है और एलिवेटिंग लार्जेस्ट्स के संयोजन में घुटने के कोण को खोलता है। खाने, हस्तांतरित करने या पेट या मूत्राशय कार्यक्रमों को सहारा देने (आसानी से लेट जाने) के लिए रिक्लाइन के कुछ लाभ हैं। आम बोलचाल की भाषा में रिक्लाइन टिल्ट के मुकाबले दबाव राहत मुहैया कराती है लेकिन शीअर के ज्यादा खतरे के साथ। टांगों को उठाना एडेमा वाले लोगों के लिए लाभदायक हो सकता है। टिल्ट और रिक्लाइन दोनों को ही फिट होना चाहिए और उनका नुस्खा सीटिंग एवं पोजीशनिंग विशेषज्ञों से प्राप्त किया जाना चाहिए।

कैसे चुनें

इस बात का निर्धारण करना जरूरी है कि व्हीलचेयर का प्रयोग कैसे किया जाएगा : केवल इनडोर? आउटडोर्स या हैवी-ड्यूटी यूज? क्या यह यात्रा के लिए आसानी से अलग हो जाती है? अपनी चेयर का चुनाव करते समय अक्सर यह बात आती है कि किस चीज की भरपाई होगी और यह आपकी पात्रता पर निर्भर करती है।

स्रोत : अमेरिकन अक्यूपेशनल थेरेपी एसोसिएशन, व्हीलचेयरनेट, एबलडेटा

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