आंत की देखरेख / Bowel Care

पाचन क्षेत्र एक खोखली नली है जो मुंह से गुदा तक जाती है। क्षेत्र का अंतिम हिस्सा आंत में उस समय तक के लिए पचे हुए भोजन के अवशिष्ट पदार्थ जमा रहते हैं जब तक उसे मल के रूप में शरीर से निकाल नहीं दिया जाता।

आंत की गतिविधि तक होती है जब मलाशय (आंत का अंतिम हिस्सा) भर जाता है और गुदा के इर्दगिर्द की मांसपेशियां (एनल स्फिंक्टर) खुल जाता है।

लकवा अकसर उन स्नायु को नष्ट कर देता है जो आंत को नियंत्रित करती हैं। अगर क्षति टी-2 स्तर से ऊपर की होती है, भरे मलाशय को महसूस करने की क्षमता खत्म हो जा सकती है। बहरहाल, एनल स्फिंक्टर सख्त रहता है। इसलिए आंत की गतिविधि रिफ्लेक्स के आधार पर होगी। इसका मतलब है कि जब मलाशय भरा होता है, मलत्याग रिफ्लेक्स होगा। इसे ऊपरी मोटर न्यूरोन या रिफ्लेक्स बावेल कहते हैं। यह सामाजिक रूप से उचित समय एवं स्थानों पर मलत्याग रिफ्लेक्स कर के किया जाता है।

टर-12 से नीचे की रज्जुमज्जा क्षति मलत्याग रिफ्लेक्स को नष्ट कर सकती है और एनल स्फिंक्टर मांसपेशी को ढीला कर देती है। इसे निम्न मोटर न्यूरोन या फ्लैसिड बावेल कहा जाता है। इस तरह के बावेल के प्रबंधन के लिए बावेल खाली करने की बार-बार कोशिश और मल को हस्तचालित उपायों से निकालने की आवश्यकता हो सकती है।

स्फिंक्टर को नियंत्रित नहीं करने की क्षमता से आंत की गतिविधि पाने की अक्षमता हो सकती है। यह आपके मल का संघातीकरण कर सकता है और ठोस अवशिष्ट बना रहता है। संघातीकरण गंभीर हो सकता है अगर यह आंत में ऊपरी हिस्से में हो।

मलत्याग दुर्घटनाओं से बचने का सर्वश्रेष्ठ तरीका समयतालिका का पालन करना है। आप अपनी आंतों को सिखाते हैं कि कब गतिविधि हो।

आंत खाली करने के तरीके

स्नायु क्षति और साथ ही अन्य कारकों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक व्यक्ति का मलत्याग कार्यक्रम विशिष्ट होना चाहिए।

ज्यादातर लोग अपने मलत्याग कार्यक्रम दिन के ऐसे समय कराते हैं जो उनकी पुरानी मलत्याग आदतों और मौजूदा जीवन शैली के अनुरूप हो। कार्यक्रम आम तौर पर किसी सपोजिटरी या लघु एनिमा के प्रवेश से शुरू होता है। इसके बाद 15-20 मिनट का प्रतीक्षाकाल होता है जिसमें उद्दीपक काम करता है। उचित होगा कि कार्यक्रम का यह हिस्सा कमोड पर पूरा किया जाए।

प्रतीक्षा काल के बाद, मलाशय के खाली होने तक हर 10-15 मिनट पर डिजिटल स्टिमुलेशन किया जाता है। शिथिल आंत वाले लोग सपोजिटरी या लघु एनिमा उलटी कर देते हैं और मलत्याग कार्यक्रम का आरंभ डिजिटल स्टिमुलेशन या हस्तचालित प्रक्रिया से करते हैं। मलत्याग कार्यक्रम पूरा होने में आम तौर पर 30-60 मिनट लगते हैं।

मलत्याग से जुड़े कुछ तथ्य:

  • रोजाना मलत्याग करना अच्छे स्वास्थ्य के लिए अनिवार्य नहीं है।
  • भोजन ग्रहण करने के बाद मलत्याग ज्यादा आसानी से होता है।
  • दो क्वार्ट तरल (या दो क्वार्ट प्रति दिन) लेने से मल मुलायम रहता है; मलत्याग का प्रयास करने से पहले गरम तरल लेने से भी मलत्याग में मदद मिलती है।
  • भूसी वाले अनाज के रूप में रेशे, सब्जियां और फल समेत स्वस्थ आहार लें। भूसी सबसे सस्ती और सबसे आसानी से उपलब्ध प्राकृतिक मृदुरेचक है।
  • सक्रियता और कसरत अच्छे आंत स्वास्थ्य को बढ़ावा देती है।

स्रोत:

स्पाइन कॉर्ड इंजरी इन्फॉर्मेशन सेंटर, यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन स्कूल ऑफ मेडिसिन, रिहैबिलिटेशन मेडिसिन डिपार्टमेंट

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