स्त्री यौन स्वास्थ्य / Sexuality for Women

शोधों से पता चलता है कि विकलांग स्त्रियों और अविकलांग स्त्रियों के यौनक्रिया के बीच का मुख्य अंतर विकलांग स्त्रियों के रोमानी यौनसंगी तलाशने में होने वाली परेशानी का नतीज़ा होता है। यौनेच्छा का स्तर समान होता है लेकिन यौन गतिविध कम होती है क्योंकि विकलांगता से ग्रस्त बहुत ही कम औरतों को यौन संगी मिलते हैं।

सहज शब्दों में कहें तो लकवाग्रस्त स्त्रियों की यौन अभिव्यक्ति पुरुषों की अपेक्षा कम प्रभावित

होती है; स्त्री के लिए अपनी यौन भूमिका का अनुकूलन करना या तय करना आसान होता है, अलबत्ता उसकी भूमिका निष्क्रिय होती है।

गर्भधारण करने की उम्र की पैरों की फालिज या चारों हाथ-पैरों की फालिज का शिकार औरतों में आमतौर पर माहवारी आने लगती है और चोट लगने के बाद 50 फीसदी औरतों का एक भी मासिक नहीं रुकता।

गर्भधारण संभव है और घायल मेरुरज्जु वाली अधिकतर औरतों का सामान्य योनिक प्रसव हो सकता है, हालांकि गर्भ के दौरान कुछ जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। इन जटिलताओं में प्रसव पीड़ा के दौरान असामयिक और स्वचालित दुष्प्रतिवर्तिता (उनमें जिनके टी-6 से ऊपर चोट लगी होती है और उसके चलते जिनका रक्तचाप बढ़ जाता है, पसीना छूटता है, कंपकपी छूटती है और सरदर्द होता है) शामिल है। इसके अलावा श्रोणि क्षेत्र में संवेदन शीलता के अभाव के कारण ऐसी औरतें जान ही नहीं पातीं कि प्रसव पीड़ा शुरू हो गयी है। गर्भ विरोध के मामले में भी कुछ विशेष ध्यान देना पड़ता है। खाने की गर्भ निरोधक गोलियां रक्त वाहिनियों में सूजन और खून के थक्के पैदा करती हैं और क्षतिग्रस्त मेरुरज्जु वली औरतों में इसका खतरा औऱ अधिक रहता है। लकवाग्रस्त औरतें अंतर्गभासयी निरोधक युक्तियों की अनुभूति ही नहीं कर सकतीं और उनसे अज्ञात जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। हाथ क्षतिग्रस्त होने के कारण वे डायएफ्रैम और शुक्राणुनाशकों का कुशलता पूर्वक इस्तेमाल नहीं कर सकतीं।

योनि में चिकनाई भी एक मुद्दा हो सकती है। एससीआई से ग्रस्त कुछ औरतें कहती हैं कि उनकी योनि में सहज चिकनाई रहती है जब कि कुछ की योनि में चिकनाई नहीं रहती। वैकल्पिक चिकनाई की जरूरत होने पर टुडे, एस्ट्रोग्लाइड, केवाई जेली-जैसी पानी में घुलनशील चिकनाइयों का उपयोग किया जा सकता है। वैसलीन के उपयोग की सलाह दी नहीं जाती क्योंकि वह तैलीय होती है।

पक्षाघात का शिकार औरतें कामोन्माद का अनुभव कर सकती हैं बशर्तें कि उनके श्रोणिप्रदेश में कुछ तंत्रिकोत्तेजन बचा हो। हालांकि ऐसा होता बहुत ही कम है। कुछ स्त्री-पुरुष शरीर के उन हिस्सों को यौन उद्दीपन देकर जो क्षतिग्रस्त नहीं होते ‘‘पैराआर्गज़्म’’ या ‘‘फ़ैंटम आर्गाज़्म’’ का अनुभव करने में सक्षम होते हैं। इसे सुखद फंतासीकृत कामोन्माद कहा जाता है जो पहले से मौजूद संवेदन को मानसिक स्तर पर तीव्र करता है।

स्रोत:

द सेंटर फ़ार रिसर्च आन वीमेन विद डिस्एबिलिटीज़, यूएबी स्पेन रिहैबिलिटेशन सेंटर/मेडिकल आरआरटीसी इन सेकंडरी कंप्लीकेशन्स इन एससीआई, पैरालाइज्ड वेटेरन्स आफ़ अमेरिका, नेशनल स्पाइनल क़ार्ड इंज़री असोसिएशन।

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